भारत का वार्षिक आर्थिक सर्वेक्षण तथा इसका महत्व

चर्चा में क्यों ?

2021-22 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण केंद्रीय बजट 2022-23 से एक दिन पहले जारी किया गया। अर्थशास्त्री तथा विश्लेषक, सर्वेक्षण के विकास अनुमानों, क्षेत्रीय विश्लेषण तथा वर्तमान की कमजोर मांग के कारणों को जानने के लिए उत्सुक होंगे।

आर्थिक समीक्षा का महत्व :-

मुख्य विशेषताएं :-

  • आर्थिक सर्वेक्षण एक प्रमुख वार्षिक दस्तावेज है जो भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करता है।
  • बजट प्रस्तुत होने से एक दिन पहले आर्थिक समीक्षा को संसद के पटल पर प्रस्तुत किया जाता है।
पहला आर्थिक सर्वेक्षण वित्तीय वर्ष (FY) 1950-51 में जारी किया गया था।
  • इसके बाद के 14 वर्षों में इसे केंद्रीय बजट के साथ पेश किया गया।
  • 1964 से आर्थिक समीक्षा को बजट से पहले प्रस्तुत किया जाने लगा। इसे संसद में बजट सत्र से एक दिन पहले जारी किया गया था।
  • हालांकि आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करना सरकार की संवैधानिक बाध्यता नहीं है। इसके साथ ही सरकार आर्थिक समीक्षा के अनुशंसाओं को मानने के लिए भी बाध्य नहीं है।
  • यह पूर्ण रूप से सरकार पर निर्भर है कि वह आर्थिक समीक्षा की अनुशंसाओं को माने अथवा ख़ारिज कर दे।
  • सर्वेक्षण पिछले वर्ष की तुलना में कृषि, विनिर्माण, रोजगार, बुनियादी ढांचे, कीमतों, निर्यात, आयात, विदेशी मुद्रा भंडार और मुद्रा आपूर्ति जैसे विभिन्न क्षेत्रों में देखे गए रुझानों का एक विहंगम अवलोकन प्रस्तुत करता है।
  • यह सरकार की नीतिगत पहलों पर प्रकाश डालता है, विकास कार्यक्रमों के प्रदर्शन की समीक्षा करता है तथा लघु व मध्यम अवधि के परिदृश्यों में अर्थव्यवस्था की संभावनाओं पर चर्चा करता है।
  • महत्वपूर्ण रूप से, सर्वेक्षण सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि को दर्शाता है, और देश के लिए आर्थिक दृष्टिकोण में एक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
  • यह मौजूदा आर्थिक स्थिति के लिए आवश्यक नीति प्रतिक्रियाओं की गुणवत्ता को इंगित करता है।
  • यह पिछले वित्त वर्ष के आर्थिक विकास का विस्तृत विश्लेषण प्रदान करता है। इस दृष्टिकोण से यह बजट निर्माण में महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान करता है।
  • मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) द्वारा आर्थिक सर्वेक्षण तैयार किया जाता है।
  • यद्यपि इस वर्ष भारत के पास कोई मुख्य आर्थिक सलाहकार नहीं था। इसीलिए प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल को दस्तावेज तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
  • हालाँकि हाल ही में सरकार ने विख्यात अर्थशास्त्री अनंत नागेश्वरन को भारत का नया मुख्य आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया है।
  • अरविन्द सुब्रमण्यम के कार्यकाल से, दस्तावेज़ दो खंडों में प्रस्तुत किया जाता रहा है-  1.पहले खंड में आम तौर पर अर्थव्यवस्था के भविष्य के कारकों का वर्णन होता है। इसमें मुख्य आर्थिक सलाहकार अपने विचार बता सकता है। 2.जबकि दूसरे खंड में पिछले वित्त वर्ष के दौरान देश में हुए आर्थिक विकास (आर्थिक आकड़ो सहित) को सूचीबद्ध किया जाता है।
  • हालाँकि इस वर्ष मीडिया स्रोतों से यह पता चला है कि आर्थिक समीक्षा का दस्तावेज मात्र एक खंड में प्रस्तुत होगा तथा यह मात्र डिजिटल स्वरुप में होगा।
  • यह सम्भावना जताई जा रही है कि इस वर्ष की आर्थिक समीक्षा में विभिन्न उद्योगों के महत्वपूर्ण आकड़ो को सम्मिलित किया जा सकता है इसके साथ ही नीतिगत प्रकरण भी समीक्षा के एक भाग के रूप में सम्मिलित होंगे

आर्थिक समीक्षा से उम्मीदे:- 

  • महामारी के प्रभावों के सन्दर्भ में, इस वर्ष अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रकों यथा -कृषि, औद्योगिक उत्पादन, सेवा, निर्माण, व्यापार और आतिथ्य ,के प्रवृत्ति विश्लेषण पर सूक्ष्म नजर रखने की आवश्यकता है।
  • इसके साथ ही साथ, रोजगार स्तर, शेष विश्व के साथ व्यापार, मुद्रा आपूर्ति, मूल्य, अवसंरचना विकास तथा अन्य प्रासंगिक आर्थिक कारको के विश्लेषण का अध्ययन किया जाना चाहिए।
  • इस संदर्भ में यह ध्यान रखना आवश्यक है कि निजी अंतिम उपभोग व्यय (सकल घरेलू उत्पाद का 54.5%) अभी भी पूर्व कोरोना स्तर तक नहीं पहुंच सका है। यह उपभोग की मांग में कमी को प्रदर्शित कर रहा है।
  • इसके साथ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों और संपर्क-गहन क्षेत्रों के प्रदर्शन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित डेटा विश्लेषण के आधार पर, आर्थिक सर्वेक्षण भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए विकास का तार्किक पूर्वानुमान प्रस्तुत करता है।
  • यह आवश्यक नीतिगत उपायों तथा उसकी राजनैतिक व्यवहार्यता के मध्य के अंतराल को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कर स्वस्थ लोकतांत्रिक चर्चा के लिए मंच प्रदान करता है।
  • सरकार द्वारा प्रदत्त प्रथम अग्रिम अनुमान (जिसे केंद्रीय बजट के लिए आवश्यक इनपुट माना जाता है) द्वारा 2021-22 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि के 9.2% की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है।
  • यह स्पष्ट है कि विगत वर्ष स्वास्थ्य सेवा अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्र में से एक रहा है। राज्यों और केंद्र ने अस्पताल के बिस्तरों और टीकाकरण की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने के लिए अन्य क्षेत्रों से संसाधनों को स्वास्थ्य क्षेत्र की तरफ मोड़ा दिया है।
  • सर्वाधिक महत्वपूर्ण यह है कि भारत द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किये गए दो कोविड टीकों के कारण फार्मा क्षेत्र में पर्याप्त आर्थिक वृद्धि हुई। भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के संस्थापकों को 26 जनवरी, 2022 को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
  • हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर के लिए बजटीय आवंटन पर मुख्य आर्थिक सलाहकार की टिप्पणी महत्वपूर्ण होगी।
  • भारत में मुद्रास्फीति की वृद्धि हो रही है। MoSPI के आंकड़ों के अनुसार, CPI और WPI की दिसंबर 2021 की दर पिछले 4 माह में उच्चतम रही।
  • कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ यूक्रेन और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव डाला है।
  • महामारी के कारण राजकोषीय घाटे में वृद्धि को देखते हुए सरकार के पास इस समस्या के निदान का उपयुक्त विकल्प नहीं दिख रहा है।
  • उपरोक्त स्थितियों के सापेक्ष मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा की गई अनुशंसाएं महत्वपूर्ण होंगी।
  • इसके साथ ही साथ आम उपभोक्ता बढ़ती मुद्रास्फीति से निदान के सन्दर्भ में आर्थिक समीक्षा के अनुशंसाओं के लिए उत्सुक होंगे।


आर्थिक समीक्षा के अन्य आयाम :-

  • आर्थिक समीक्षा में कृषि कानूनों को निरस्त करने के कारणों का वर्णन हो सकता है।
  • बजट 2021 में सरकार ने 1.75 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रखा था। रिपोर्ट्स बताती हैं कि सरकार निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे है। इस सन्दर्भ में आर्थिक समीक्षा की टिप्पड़ी महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ ही इस संदर्भ में सरकार द्वारा बताये गए रोडमैप पर सभी का ध्यान होगा।
  • न्यायिक सुधारो के माध्यम से व्यवसायिक विवादों के त्वरित समाधान की आवश्यतकता का वर्णन किया जा सकता है। इसके साथ ही साथ प्रशासनिक सुधारो की आवश्यकता पर भी चर्चा की जा सकती है।
  • भारत को 5 ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए समग्र व्यापारिक इकोसिस्टम में सुधार के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत किया जा सकता है।

निष्कर्ष :-

आर्थिक सर्वेक्षण देश के प्रशासन में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक है। यह वित्तीय नियोजन के लिए महत्वपूर्ण है तथा यह देश के आर्थिक स्वास्थ्य पर अंतर्दृष्टि को सम्मिलित करता है। यह अर्थव्यवस्था से सम्बंधित प्रमुख चुनौतियों को उजागर करने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

स्रोत Livemint

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